नई दिल्ली. राजनीति भी बहुत अजीब होती है जिन बातों के लिए आप चुनाव के समय लोगों को मना करते हैं उन्हीं बातों को आपको बाद में मानना भी पड़ता है. दिल्ली सरकार हिंसा में पीड़ित लोगों को मुआवजे का ऐलान किया है. मुआवजे में केजरीवाल सरकार ने जरूरी कागजात दिखाने के लिए कहा है. सरकार की ओर से जारी विज्ञापन में मुआवजे की राशि के लिए कागजात को जरूरी मांना गया है. अगर दिल्ली हिंसा के पीड़ित मुआवजे की रकम चाहते हैं तो उन्हें वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड दिखाना ही होगा. उसके बाद ही उन्हें मुआवजे की राशि मिल पाएगी. गौरतलब है कि सीएए का विरोध करने वाले लोग कागज ना दिखाने की शर्त पर ही अपना विरोध जारी रखे हुए थे.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि केजरीवाल सरकार ने प्रदेश के मुसलमानों से सीएए के विरोध में कागज़ न दिखाने को कहा था. ऐसे में केजरीवाल सरकार द्वारा काग़ज़ों की मांग पर मुसलमानों में चिंता देखी जा रही है.
गौरतलब है नागरिकता संशोधन कानून के समर्थक और विरोधियों के बीच दिल्ली में हुई हिंसा में कई लोगों की जान चली गई थी और कई लोग घायल हो गए थे. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम ने हिंसा में पीड़ित लोगों के लिए भारी-भरकम मुआवजे का ऐलान कर दिया. मुवावजे के एलान से कोई दिक्कत नही थी, दिक्कत तब हुई जब सरकार ने मुवावजा राशि के लिए काग़ज़ात जरूरी कर दिए. मुवावजे के लिए भरे जाने वाले फॉर्म में वोटर आईडी और आधार कार्ड के नम्बर मांगे गए हैं.
अब सवाल यह है कि सीएए और एनआरसी के लिए किसी तरह का कागज दिखाने का विरोध करने वाले लोग मुआवजा के लिए कागज दिखाते हैं या नहीं. दिल्ली के शाहीन बाग प्रदर्शन को लेकर केजरीवाल सरकार पहले से ही विवादों में है. ऐसे में दंगा पीड़ितों के लेकर मुख्यमंत्री केजरीवाल की दोहरी नीति सामने आई है.
फॉर्म में मांग ली जानकारी
आम आदमी पार्टी के नेता और खुद केजरीवाल दिल्ली चुनाव के दौरान गली मोहल्लों में कागजात न दिखाने की अपील करते देखे गए थे.
अब केजरीवाल सरकार ने यू टर्न लेते हुए मुआवजे के लिए निकाले गए फॉर्म में वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड की छाया प्रतिलिपि मांगी है. अब नागरिकता कानून का विरोध कर रहे लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया है कि आखिर अब वह क्या करें?

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