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Corona update: कोरोना को लेकर सरकार और विशेषज्ञों की राय अलग, सिर्फ पढ़िये डरिये नही

नई दिल्ली. भारत में करोना वायरस के प्रभाव को लेकर सरकार और विशेषज्ञों की राय जुदा है. विशेषज्ञों के एक समूह का कहना है कि देश में घनी और मध्यम आबादी वाले क्षेत्रों में कोरोनावायरस का सामुदायिक प्रसार हो चुका है जबकि सरकार की राय विशेषज्ञों से अलग है. सरकार का मानना है कि अभी कोरोना का संक्रमण देश में सामुदायिक प्रसार के स्तर पर नहीं पहुंचा है.

आंकड़े क्या कहते हैं

देश में कोरोना संक्रमण के आंकड़ों की अगर बात की जाए तो वर्तमान में देश में 190535 कोरोनावायरस हो गए हैं जिनमें 5394 की मृत्यु हो गई है. कोरोना वायरस के इसी डरावनी तस्वीर को भारतीय लोक स्वास्थ्य संघ, इंडियन एसोसिएशन आफ प्रीवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन और भारतीय महामारी विद संघ ने एक रिपोर्ट तैयार कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी है.

रिपोर्ट के मुताबिक

“देश की घनी और मध्यम आबादी वाले क्षेत्रों में कोरोनावायरस संक्रमण के सामुदायिक प्रसार की पुष्टि हो चुकी है और इस स्तर पर कोविड-19 को खत्म करना वास्तविक जान पड़ता है. राष्ट्रव्यापी लॉक डाउन महामारी के प्रसार को रोकने और प्रबंधन के लिए प्रभावी योजना बनाने के लिए किया गया था ताकि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली प्रभावित ना हो यह संभव हो रहा था. लेकिन नागरिकों को हो रही असुविधा और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के प्रयास में चौथे लॉक डाउन में दी गई राहत के कारण यह प्रसार बढ़ा है.”

विशेषज्ञों ने आगे कहा

“महामारी से निपटने के उपायों संबंधी निर्णय लेते समय महामारी विदों से सलाह नहीं ली गई. भारत सरकार ने महामारी विदों से परामर्श लिया होता जिन्हें अन्य की तुलना में इनकी बेहतर समझ होती है तो शायद बेहतर उपाय किए जाते. ऐसा लगता है कि मौजूदा सार्वजनिक जानकारी के आधार पर सरकार को चिकित्सकों और अकादमिक महामारी विज्ञानियों द्वारा सलाह दी गई थी.”

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि

” नीति निर्माताओं ने स्पष्ट रूप से सामान्य प्रशासनिक नौकरशाहों पर भरोसा किया जबकि इस पूरी प्रक्रिया में महामारी विज्ञान, सार्वजनिक स्वास्थ्य निवारक चिकित्सा और सामाजिक वैज्ञानिक क्षेत्र के विशेषज्ञों की भूमिका काफी सीमित थी. भारत इस समय मानवीय संकट और महामारी के रूप में भारी कीमत चुका रहा है.”

समूह में शामिल हैं यह दिग्गज

कोविड-19 सदस्य संयुक्त समूह में एक से एक दिग्गज शामिल है. जिनमें आईएपीएसएम के पूर्व अध्यक्ष और दिल्ली एम्स में सामुदायिक चिकित्सा केंद्र के प्रमुख डॉ शशिकांत, आई पी एच ए के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पीसीएम एम्स के प्रोफेसर डॉ संजय के राय, सामुदायिक चिकित्सा आई एम एस बी एच यू वाराणसी के पूर्व प्रोफेसर और प्रमुख डॉ डीपीएस रेड्डी, डीसीएम और एस पी एच पी जी आई एम ई आर चंडीगढ़ के पूर्व प्रोफेसर और प्रमुख डॉ राजेश कुमार शामिल है.

डरिए मत सतर्क रहिए

रिपोर्ट से घबराने की जरूरत नहीं है केवल सतर्क रहने की आवश्यकता है. सरकार की गाइडलाइन और अपनी सुरक्षा के लिए जागरूक रहना आवश्यक है. मास्क के साथ भीड़भाड़ वाली जगहों से बचाने की जरूरत है. ( Source- pk news )

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Prakash Pandey

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