माटी के रंग

कोरोना हो भी सकता है……

कोरोना हो भी सकता है……

तू अपने घर से गर निकाला कोरोना हो भी सकता है.
अगर तू अब भी ना संभला कोरोना हो भी सकता है.

रहेगा भीड़ से बचकर ज़रा भी कुछ नहीं होगा.
रहेगा तू हिफाजत मैं जो अपने हाथ मुंह धोगा.
फिरेगा बन के गर पगला कोरोना हो भी सकता है.
तू अपने घर गर निकाला कोरोना हो भी सकता है.

ना जादू हैं ना टोना हैं बड़ा मूज़ी खिलौना है.
बदन से जिस के लग जाये तो मय्यत का बिछौना है.
पता कब किस पे हो हमला कोरोना हो भी सकता है.
तू अपने घर गर निकाला कोरोना हो भी सकता है.

हमे वक़्त ए जरुरत पर ही घर से बाहर जाना हैं.
किसी होटल मैं ढेले पर ना डब्बा पैक खाना हैं.
अगर तू आज ना बदला कोरोना हो भी सकता है.
तू अपने घर गर निकाला कोरोना हो भी सकता है.

सैनेटाइज़र से धो के हाथ घर आफिस मैं रहना है.
हो मुंह पे मास्क भी पहना हर एक डाक्टर का कहना है.
ना छूना खिड़की और जंगला कोरोना हो भी सकता है.
तू अपने घर गर निकाला कोरोना हो भी सकता है.

हमें सब को बताना है, हमें सब को बचाना हैं.
गरीबों के घरों का बोझ भी मिलकर उठाना है.
हैं जद मैं झोपड़ी बंगला कोरोना हो भी सकता है.
तू अपने घर गर निकाला कोरोना हो भी सकता है.

रहेंगे हम तभी शादाब मिलकर एक रहना हैं.
हमें सरकार का हर फैसला मंजूर करना हैं.
अगर वादे से तू फिसला कोरोना हो भी सकता है.
तू अपने घर से गर निकाला कोरोना हो भी सकता है.
अगर तू अब भी ना संभला कोरोना हो भी सकता है.
……शादाब जफर शादाब
नजीबाबाद, बिजनौर

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Prakash Pandey

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