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Budget 2020: क्या पीएम मोदी के ये पांच पांडव बदल देंगे अर्थव्यवस्था की तस्वीर, क्या आप जानते हैं इन पांचों को

Budget 2020: मध्यम वर्ग के लिए खास होगा आम बज़ट, जानिए उन पांच अफसरों को जिन्होंने बज़ट की बदल दी तस्वीर

नई दिल्ली. देशभर में आर्थिक सुस्ती की बहस के बीच 1फरवरी को बजट 2020 पेश होने वाला है. बजट को लेकर हर देशवासी उत्सुक है. वह जानना चाहता है कि आम बजट में उसके लिए खास क्या है? आर्थिक रफ़्तार के पिछले काफी समय बेपटरी हो जाने से ना केवल सरकार बल्कि देश हर नागरिक चिंतित है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस सुस्ती से कैसे निपटेगी? किसानों के लिए विशेष क्या होगा और टैक्स में मिलने वाली राहत क्या होगी? किसान से लेकर नौजवान, उच्च वर्ग से लेकर निम्न वर्ग सब बज़ट को लेकर उत्सुक हैं.

पांच अधिकारी जिनपर है बेहतर बज़ट की जिम्मेदारी

खबरों की माने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद पूरे बज़ट को लेकर निगरानी बनाये हुए हैं. इसके लिए उन्होंने अपने खास पांच अधिकारियों को चयनित भी किया है. मोदी सरकार के ये पांच होनहार अधिकारी राजीव कुमार, अतनु चक्रवर्ती, टीवी सोमनाथन, अजय भूषण पांडेय और तुहीनकांत पांडेय हैं. पांचों अधिकारी सरकार की आय-व्यय का लेखा जोखा तैयार करने में सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं.

प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना सकें, इस दिशा में कोशिश कर रहे हैं. साथ ही मिडिल क्लास के लिए कुछ विशेष करने की कोशिश भी की जारी है. वित्त मंत्री सीतारमण एक फरवरी को बजट 2020 भाषण को पेश करेंगी. बजट की छपाई भी वित्त मंत्रालय स्थित प्रिंटिंग प्रेस में शुरू हो चुकी है. छपाई के लिए 50 से अधिक कर्मचारियों की टीम दिन-रात काम कर रही है. मोदी के पांच नायक भी लगातार अपने काम को अंजाम दे रहे हैं.

इस बातों पर रहेगी खास नज़र

लोगों में फ्रिज, टेलीविजन आदि की खरीद में दिलचस्पी नहीं रही है साथ ही कार भी प्राथमिकता में सबसे नीचे है.वीएमआर के सर्वेक्षण में संकेत मिलता है कि लोगों की जेब में पैसे डालने की ज़रूरत है.

राजीव कुमार करेंगें बैंकिंग सेक्टर में सुधार

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, वित्त सचिव राजीव कुमार को बैंकों की सेहत सुधारने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वह बजट में बैंकिंग सुधारों से जुड़ी घोषणाओं पर काम कर रहे हैं. पूर्व में बैंकों के विलय और उनके पूंजीकरण को लेकर काम कर चुके राजीव कुमार के पास बैंकिंग सुधारों का लंबा अनुभव है. राजीव क्रेडिट ग्रोथ बढ़ाने जैसे मसलों पर इनपुट देने के काम में जुटे हैं.

अतनु बढ़ाएंगे सरकार की कमाई

सरकारी संपदाओं पर खासी पकड़ और उनकी बिक्री के एक्सपर्ट अतनु चक्रवर्ती वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट को तैयार करने में मदद कर रहे हैं. अतनु को राजकोषीय घाटे को संतुलित करने का काम दिया गया है. वह अर्थव्यवस्था को कैसे बेहतर बनाया जा सके और उसके लिए आवश्यक संसाधन क्या हों, इस पर फोकस कर रहे हैं.

बेकार के खर्चों पर लगाम लगाएंगे टीवी सोमनाथन

भारत सरकार में व्यय सचिव टीवी सोमनाथन सरकार के खर्च की रणनीति बनाने की कोशिशों में जुटे हैं. बेकार खर्च पर रोक और डिमांड को बढ़ाने के लिए वह सरकारी योजनाओं का प्लान कर रहे हैं. पीएमओ में काम कर चुके सोमनाथन का पीएम नरेंद्र मोदी के साथ अच्छा तालमेल है और वह यह समझते हैं कि बजट को लेकर प्रधानमंत्री की क्या उम्मीदें हैं?

रेवेन्यू कलेक्शन को बढ़ाने की जिम्मेदारी अजय भूषण पाण्डेय पर

रेवेन्यू में लगातार गिरावट के चलते दबाव झेल रहे राजस्व सचिव अजय भूषण पांडेय पर अहम जिम्मेदारी है. कॉरपोरेट टैक्स के कलेक्शन में इजाफे और पर्सनल टैक्स को लेकर भी पाण्डेय काम कर रहे हैं. प्रत्यक्ष कर संहिता में कुछ प्रस्तावों को स्वीकार करने के बारे में पाण्डेय अपनी राय दे सकते हैं.

विनिवेश से सरकारी खज़ाना झोली भरने की जिम्मेदारी तुहीन पर

पिछले कई सालों से घाटे में चल रहे एयर इंडिया को बेचने का जिम्मा संभाल रहे तुहीनकांत पांडेय पर विनिवेश के जरिये सरकारी खज़ाना भरने की जिम्मेदारी है. मौजूदा वित्त वर्ष के लिए सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये विनिवेश का लक्ष्य रखा था, जो मुश्किल लग रहा है. इस साल यह टारगेट मुश्किल लग रहा है, ऐसे में आय को बढ़ाने के लिए विनिवेश के लक्ष्य को बढ़ाया जा सकता है.

वीएमआर के सर्वे ने बढ़ाई सरकार की चिंता

वीएमआर के सर्वे के मुताबिक निम्न-मध्यवर्ग अपनी स्थिति से दुखी है. ऐसे में लोग पैसे खर्च करने से बच रहे हैं, जो चिंता का विषय बना हुआ है.
आम बजट से ठीक पहले वीएमआर ने तकरीबन 5,000 लोगों पर बजट को लेकर सर्वे किया. सर्वे के मुताबिक 35.50 प्रतिशत लोगों ने अपनी आर्थिक स्थिति को पहले की तरह ही माना है जबकि लगभग 28.5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है या उनकी स्थिति बदतर हुई है. सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि सिर्फ सात प्रतिशत लोगों ने माना है कि उनकी स्थिति पहले से बहुत खराब हुई है. यदि मध्य वर्ग को दो वर्गों में मतलब उच्च मध्य वर्ग और निम्न मध्य वर्ग में अलग कर दें तो उच्च मध्यवर्ग के लोगों ने कहा है कि उनकी स्थिति बेहतर हुई है. लेकिन निम्न-मध्यवर्ग के लोग आर्थिक स्थिति को लेकर खुश नहीं है.

आर्थिक स्थिति को लेकर लोगों ने किया बदलाव

अब यह भी जान लीजिए कि लोग अपना पैसा कहां और कितना खर्च करना चाहते हैं. सर्वे में शामिल लोगों से पूछा गया कि यदि उन्हें एक लाख रुपये दे दिये जायें तो वे क्या करेंगे, इस सवाल का जवाब अलग-अलग समुदाय के लोगों ने अलग-अलग तरीके से दिया. लगभग 62 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे पैसे बचा लेंगे, खर्च नहीं करेंगे. 17 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे इस पैसे से अपने पुराने कर्ज चुकायेंगे. सिर्फ 21 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे इस पैसे से कुछ खरीदेंगे. मतलब साफ है कि लोग रोटी कपड़ा मकान से अलग लोग कुछ भी नही सोच पा रहे हैं. ऐसे में सरकार पर इस दिशा में काम करने का भारी दबाव होगा. क्या बदलाव होंगे ये तो आने वाला बज़ट ही तय करेगा, लेकिन सरकार को बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देने की जरूरत से इंकार नही किया जा सकता.
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Prakash Pandey

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