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दुनिया कोरोनावायरस की दवाई खोज रही है और देश की यह महत्वपूर्ण यूनिवर्सिटी गिलोय लगा रही है, क्यों?

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए पूरे विश्व में युद्ध स्तर पर दवाइयां खोजने का काम चल रहा है. इसी बीच देश की सबसे महत्वपूर्ण यूनिवर्सिटी में से एक काशी हिंदू विश्वविद्यालय गिलोय की नर्सरी लगवा रही है.
दरअसल गिलोय को प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का अच्छा माध्यम माना जाता है और कोरोनावायरस के इस दौर में बचने का सबसे बड़ा साधन रोग प्रतिरोधक क्षमता का बढ़ना है.
इसी को ध्यान में रखते हुए काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी के 4 जिलों वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली और मिर्जापुर के 3 जिलों मिर्जापुर, सोनभद्र, और भदोही में गिलोय की नर्सरी लगवा दी है.
इस संबंध में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में चिकित्सा विज्ञान संस्थान के आयुर्वेद संकाय के डीन और उत्तर प्रदेश में गिलोय मिशन के परियोजना संयोजक डॉक्टर वाई बी त्रिपाठी ने समाचार एजेंसी को इसके महत्व के बारे में बताया. उन्होंने कहा

“हमने लॉक डाउन के दौरान 7 जिलों में गिलोय की 600 नर्सरी लगवाई है. प्रदेश में 2 महीने से यह परियोजना चल रही है. इसी लॉक डाउन के दौरान गिलोय की नर्सरी लगवाई गई.”

उन्होंने बताया

“घर बैठे 500 किसानों से संपर्क कर उन्हें नर्सरी लगाने के लिए प्रेरित किया गया. लॉक डाउन खुलने पर सभाएं की जाएंगी. गिलोय के गुणों के बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा और 2 लाख गिलोय के पौधे निशुल्क वितरण किया जाएगा.”

जान लीजिए अमृता के गुण

गिलोय को अमृता भी कहा जाता है. इसके संबंध में 1990- 91 में के ई एम हॉस्पिटल मुंबई में अनुसंधान हो चुका है जिसमें यह साबित हुआ है कि गिलोय में बहुत से गुण हैं. गिलोय किडनी को ठीक रखता है, बुखार को दूर करता है. यही कारण है कि गिलोय का दूसरा नाम अमृता भी है.

गिलोय का करें सेवन और फिर देखें कमाल

गिलोय इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का सबसे बड़ा माध्यम भी है. आंवले की तरह ही गिलोय या गुडुच भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी बेल को आसानी से कहीं भी लगाया जा सकता.

बीएचयू करेगा लोगों को प्रेरित

हिंदू विश्वविद्यालय गिलोय के प्रभाव को देखते हुए लोगों को गिलोय लगाने के लिए प्रेरित करेगा. साथ ही साथ गिलोय के फायदे और उसके प्रयोग की विधि भी लोगों के साथ साझा करेगा.
निश्चित तौर पर बीएचयू का यह प्रयास आम आदमी को राहत देने वाला है क्योंकि आयुष मंत्रालय भी कोरोना के खिलाफ लड़ाई में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले पदार्थों के सेवन की राय दे चुका है. ऐसे में बीएचयू का यह प्रयास अचूक साबित हो सकता है.

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Prakash Pandey

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