बोल वचन खास

36 साल बाद फिर दर्द मिला देश को, गैस रिसाव ने 84 को जिंदा किया, दिल को दहला दिया

विशाखापट्टनम एक फैक्ट्री में गैस रिसाव की दिल दहलाने वाली घटना ..

सांसे उखडने पर लोग सोते हुए घरों से बदहवास निकले..

आज सुबह एक दर्दनाक खबर सामने आई कि विशाखापट्टनम में एक फैक्ट्री में गैस रिसाव हुआ, जिसने 11 लोगों की जान ले ली. जबकि 300 से ज्यादा लोग अस्पताल में एडमिट हैं. मामले की जांच के लिए सरकार ने कमेटी बनाई है. विशाखापट्टनम में ऐसा भयानक मंजर पहले किसी ने नहीं देखा था. बच्चे,बुजुर्ग,औरतें और मर्द. सांस के एक-एक कतरे के लिए हर कोई तरसता और तड़पता नजर आ रहा था , सांस उनके बस में थी वो भी ये मंजर देखकर बेसुध हुए जा रहे थे. रात के अंधेरे में ही हवा में ऐसा जहर घुल चुका था कि लोगों की आंख खुलने से पहले ही सांसें उखड़ने लगी.अपने बेहोश बच्चों को गोद में उठाए मदद के लिए बदहवास घूम रहे माता-पिता, सड़कों पर पड़े लोग, पीड़ितों को जल्द से जल्द चिकित्सकीय सहायता देने की कोशिश में जुटे स्वास्थ्यकर्मी और घटनास्थल से जान बचाकर भाग रहे लोग…. यहां गैस रिसाव के बाद दिल दहलाने वाले इस मंजर ने 1984 भोपाल गैस त्रासदी की भयावह यादें ताजा करा दीं. एलजी पॉलिमर्स रासायनिक संयंत्र से हुए स्टाइरीन वेपर रिसाव के बाद यह मार्मिक दृश्य देखने को मिले. संयंत्र से गैस का रिसाव गुरुवार को तड़के उस समय हुआ, जब लोग सो रहे थे.इस रिसाव के बाद सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहीं महिलाओं और बच्चों को सड़कों पर पड़े देखा गया. इन दृश्यों ने उस भीषण भोपाल गैस त्रासदी की याद दिला दी, जब यूनियन कार्बाइड के संयंत्र से गैस रिसाव के कारण करीब 3,500 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग शारीरिक रूप से अक्षम हो गए थे. विशाखापट्टनम में गैस रिसाव से सर्वाधिक प्रभावित हुआ गोपालपत्तनम गांव मदद के लिए गुहार लगा रहे लोगों की चीखों से सिहर उठा.गांव के एक निवासी ने बताया कि कई लोग नींद में ही बेहोश हो गए. रिसाव के कारण प्रभावित हुए लोगों को ऑटोरिक्शा और दो पहिया वाहनों से अस्पताल ले जाया गया. विशाखापट्टनम कलेक्टर विनय चंद ने बताया कि गैस रिसाव की जानकारी मिलते की 20 एम्बुलेंस घटनास्थल पर भेजी गईं. स्टाइरीन के संपर्क में आने से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र प्रभावित हो सकता है, इससे सिर दर्द, थकान, कमजोरी और अवसाद जैसी समस्या पैदा हो सकती है. इसे पॉलीस्टीरीन प्लास्टिक या रेजिन बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में हुई गैस लीक ट्रेजडी से नुकसान का अंदाजा अभी लगना मुश्किल है. घटनास्‍थल से जो रिपोर्ट्स आ रही हैं, उसके मुताबिक, कई घरों से लोगों को दरवाजे तोड़कर निकालना पड़ा है. राहत और बचाव के काम में लगी टीमें लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने में जुटी हैं. केमिकल प्‍लांट के तीन किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों से लोगों को निकाला जा रहा है. हो सकता है इससे ज्‍यादा एरिया को भी खाली कराना पड़े. पूरा मंजर इतना भयावह था कि 1984 भोपाल गैस ट्रेजडी की यादें ताजा हो गईं. वैसा ही खौफ, वैसी ही बदहवासी देखने को मिल रही है.

…………शादाब जफर शादाब
स्वतंत्र पत्रकार

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Prakash Pandey

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