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बोल वचन खास

Republic day special: मिट जाऊं वतन पर ये मेरे दिल मैं लगन हैं…

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर बज्म ए ज़िगर की ओर से एक शाम शहीदों के नाम का आयोजन…

गणतंत्र दिवस के अवसर पर बज्म ए जिगर नजीबाबाद की ओर से शायर शादाब जफर शादाब के निवास नजमी हाऊस में एक शाम देश के वीर शहीदों के नाम से कवि सम्मेलन, मुशायरे का आयोजन किया गया. जिस की अध्यक्षता करते हुए पूर्व चेयरमैन नगर पालिका परिषद नजीबाबाद जनाब मौहम्मद मौअज़्ज़म खां एडवोकेट ने अपने सम्बोधन में कहा कि देश की दुश्मन ताकते हम देशवासियों में हिन्दू मुस्लिम के बीज बो कर हमें आपस में लडाना चाहते हैं पर जब तक अदब की ये गंगा जमनी महफ़िल ए क़ायम होती रहेंगी, हमारे देश में अपनी कविताओं, गीतों, ग़ज़लों के माध्यम से एकता अखंडता, भाईचारे का संदेश देने वाले कवि शायर मौजूद हैं तब हमारे मुल्क की हिन्दू मुस्लिम एकता अखंडता को कोई नहीं मिटा सकता.
कार्यक्रम का आगाज अकरम जलालाबादी ने अपनी खूबसूरत आवाज़ में देश प्रेम में डूबी अपनी रचना से कुछ यू किया..इस तिरंगे की आबरू रखना.रात दिन ये ही ज़ुस्तज़ु रखना.
शकील अहमद वफ़ा ने देश प्रेम की रचना से शहीदों को नमन: करते हुए कहा.. ये मेरी ज़मीं,मेरा गगन मेरा वतन हैं, धरती पे मेरे खूब हिमालय की फबन हैं.
नौजवान शायर नौशाद अहमद शाद ने हिंदोस्ता की गौरवगाथा बयान करते हुए कहा.. हिन्दुस्तान में रहता हूं मैं हिन्दुस्तान में रहता हूं, मैं प्यार मौहब्बत मैं सब की पहचान में रहता हूं.
अब्दुल रज्जाक सलमानी ने कहा…ये आफ़त में आ गया हूं मैं.लगता हैं शराफ़त मैं आ गया हूं मैं.
डॉ.तैय्यब जमाल ने वतन परस्ती पर उम्दा कलाम पेश करते हुए कहा..ज़माने में जिसे सब लोग हिन्दुस्तान कहते हैं,
कोई पूछे अगर हमसे हम अपनी जान कहते हैं.
मेज़बान शायर शादाब जफर शादाब ने अपने वतन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा…मिट जाऊ वतन पर ये मेरे दिल में लगन है.नज़रो में मेरी कब से तिरंगे का कफन है.
कवि कपिल जैन ने अपनी ओज रचना के माध्यम से वीरों की वीरता को सलाम करते हुए कहा…मेरी कविता की थाली में राष्ट्र प्रेम का चन्दन है,
मुक्तक छंदों की रोली से भारत का अभिनन्दन है.
शायर मौसूफ अहमद वासिफ ने प्यारे महबूब वतन की अज़मत पर कहा…बात आई कभी जब तेरी शान पर,सर से बांधा कफ़न खेले हम जान पर.
डॉ.बेगराज यादव ने देश के वीर शहीदों को याद करते हुए कहा..देश प्रेम की भावना दिल में जगाकर तॊ देखो,हिंदोस्तां जाँ से प्यारा, नारा लगाकर तॊ देखो.
उस्ताद शायर महेंद्र अश्क ने उम्दा ग़ज़ल पेश करते हुए कहा..रंगीन दिल गरी के ये मंज़र कहां हुए थे, ये तो मौहब्बतो के मौसम जवां हुए थे..
मुशायरे में मरगूब हुसैन नासिर,अबरार सलमानी,एम.डी.खान,मसूद अहमद, शहबाज खान,असद नजमी एडवोकेट,नफीस अहमद, शमशाद अहमद,अदीब शादाब आदि मौजूद रहे.

कार्यक्रम की अध्यक्षता मौअज़्ज़म खां एडवोकेट व संचालन मौसूफ अहमद वासिफ ने किया. कार्यक्रम के अंत में शायर डॉ.आफताब नौमानी की सेहतमंदी के लिए दुआ की गई वही मशहूर शायर बशीर बद्र के बेटे नुसरत बद्र के निधन पर दो मिनट का मौन रख कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई.

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Prakash Pandey

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