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सिनेमा खास

Omg: एक अविवाहित पुरूष और विवाहित महिला के बीच प्रेम ने समाज को दरकिनार कर बनाई जगह, और लिखा गया दूसरा अध्याय, पूरी कहानी को जानिये

दूसरा अध्याय’ की परिकल्पना से लेकर मंचन तक का सफर मुश्किलों और चुनौतियों से गुज़रा. पूरी प्रस्तुति रंगमंच की दुनिया में अंधाधुंध कोलाहल के बीच सार्थक व रचनात्मक रिएक्शन है-पवन शर्मा

सहारनपुर. रंग संस्था अदाकार ग्रुप की भावप्रवण प्रस्तुति ‘दूसरा अध्याय’ के मंचन ने कला प्रेमियों के दिल-ओ-जहन पर अलग ही छाप छोड़ी. बेहद गंभीर व संवेदनशील कथानक पर केंद्रित नाटक में हर किसी ने अपनी-अपनी ज़िंदगी का प्रतिबिम्ब बखूबी महसूस किया. इस अवसर पर नाटक की पूरी टीम को सम्मानित भी किया गया।


जनमंच प्रेक्षागृह में मानसी की ओर से आयोजित उत्सव-ए-रंगमंच के पहले दिन पवन शर्मा के निर्देशन में मंचित नाटक में दर्शाया गया कि, अविवाहित अभय व विवाहित नीरजा मद्रास में एक ट्रेनिंग के दौरान मिलते हैं. दोनों मेें प्रेम की शुरुआत होती है. मोहब्बत के महीन धागों से बुना यह रिश्ता तमाम उतार-चढ़ाव से गुज़रता है. चरम पर पहुंची कशमकश, असमंजस और अंर्तद्वंद्व के बीच अभय अनायास ही नीरजा को विदा कहकर विदेश चला जाता है. हालात नए मोड़ लेते हैं और लंबे अंतराल के बाद फिर नीरजा तथा अभय आमने-सामने होते हैं. इस बार, नीरजा को अभय का साथ चाहिए लेकिन, हालात इस हद तक तब्दील हो चुके हैं कि, एक बार फिर दोनों को एक मोड़ पर ठहरना पड़ता है. नाटक में इन दोनों केंद्रीय पात्रों के बीच इसी रुमानियत, कशमकश, बेचैनी, उलझन और तनाव को अलग-अलग दृश्यों में बेहद खूबसूरती के साथ पिरोने की काबिल-ए-तारीफ कोशिश पूरे मंचन में प्रमुखता से नज़र आई.वहीं, मंच पाश्र्व में बेहतरीन संगीत और उत्कृष्ट प्रकाश व्यवस्थापन के साथ खासी मेहनत और कलात्मकता से तैयार सेट भी दर्शकों के दिल-ओ-जहन पर अलग ही छाप अंकित कर गए.


नाटक के समापन पर निर्देशक पवन शर्मा ने पूरी टीम का परिचय कराया. उन्होंने बताया कि, ‘दूसरा अध्याय’ की परिकल्पना से लेकर मंचन तक का सफर कितनी मुश्किलों और चुनौतियों से गुज़रा. उन्होंने पूरी प्रस्तुति को रंगमंच की दुनिया में अंधाधुंध कोलाहल के बीच सार्थक व रचनात्मक रिएक्शन करार दिया. नाटक में, अभय का किरदार कई वर्ष से टेलीविजन व फिल्मों की दुनिया में सक्रिय रंगकर्मी अशोक वर्मा ने जी-जान से निभाया तो वहीं, नीरजा की बेहद संवेदनशील भूमिका में आरती शर्मा ने जीवंत अभिनय की परिभाषा को नए आयाम दिए. दोनों कलाकारों में बेहतरीन तालमेल और प्रभावी संवाद अदायगी का सिलसिला दर्शकों ने भरपूर सराहा तो वेटर की भूमिका में युवा रंगकर्मी पारस रंधावा सहित संक्षिप्त भूमिकाओं में अनुषी अग्रवाल व नीरज चौधरी ने भी किरदारों से न्याय किया. बेहतरीन मंच सज्जा में विक्रान्त जैन, संगीत में विवेक आर्यन, प्रकाश संयोजन में काशिफ नून सिद्दीकी सहित मंच व्यवस्थापन में रीतिका वालिया, प्रभाकर द्विवेदी, पारस छाबड़ा, नूर आलम आदि ने बखूबी जिम्मेदारियां निभाईं. योग गुरु पद्मश्री भारत भूषण ने ‘दूसरा अध्याय’ की पूरी टीम को स्नेहाशीष देते हुए रंगकर्म की अलख सदा जगाए रखने के लिए प्रेरित किया. आईआईए के चेयरमैन रविंद्र मिगलानी, कोषाध्यक्ष मनजीत सिंह अरोड़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरजीत सिंह, महासचिव राजेश सपरा, वरिष्ठ शिक्षाविद् सुरेंद्र चौहान, सुषमा बजाज, सिंपल मकानी, आप नेता योगेश दहिया, शीतल टंडन, मानसी के के के गर्ग, योगेश पंवार, शिशिर वत्स, राजीव सिंघल, राजेश गुप्ता, मोहसिन, सुहेल अख्तर, अभि धीमान, रीतिका काम्बोज, शानू सिद्​दीकी आदि उपस्थित रहे. आयोजकों की ओर से निर्देशक पवन शर्मा सहित पूरी टीम को स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया गया. अदाकार ग्रुप के अध्यक्ष जावेद खान सरोहा ने सभी का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि अदाकार ग्रुप हमेशा लीक से अलग हटकर सार्थक व प्रयोगधर्मी रंगमंच करता रहा है. ‘दूसरा अध्याय’ सरीखे बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण कथानक पर नाटक मंचित करना इसी का प्रत्यक्ष प्रमाण है. आगे भी इसी दृष्टिकोण के साथ अदाकार ग्रुप कला प्रेमियों तक अभिनव प्रस्तुतियां पहुंचाता रहेगा.