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पांडेयजी तो बोलेंगे वीडियो

गज़ब: पुलिस का ऐसा रूप आपने भी नहीं देखा होगा, ड्यूटी तो करनी ही है लेकिन ऐसे करनी है?

पुलिस के बारे में लोगों में एक अलग अवधारणा है. लोग अपने अपने सुविधा के अनुसार पुलिस को परिभाषित करने की कोशिश करते हैं. लेकिन वास्तव में कभी एक दिन फुर्सत में बैठकर पुलिस के लिए सोचिएगा, आपको बहुत कुछ दिखाई देगा. एक वीडियो इस न्यूज़ में भी है समझने को काफी है. देख लीजिए.


लखनऊ. उत्तर प्रदेश में शाहीन बाग बनाने की कोशिश का प्रदेश सरकार के निर्देश पर पुलिस ने जन्म लेने से पहले ही किस्सा खत्म कर दिया. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों के बर्तन, रजाई, खाने पीने के सामान समेत कई चीजें ज़ब्त कर ली. हालांकि प्रदर्शनकारियों ने इसके विरोध में पुलिस को बहुत कुछ कहा लेकिन पुलिस अपना काम करती रही.
अगर आप पुलिस के बारे में गलत धारणा रखते हैं तो यह खबर आपके काम
की हो सकती है. पुलिस के बारे में हर इंसान की अपनी अवधारणा है, अपनी सोच है और हर व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार ही पुलिस को परिभाषित करता है. लेकिन एक दिन सिर्फ और सिर्फ पुलिस के लिए फुर्सत में बैठकर सोचिएगा. देखिएगा पुलिस कितना सब्र सेे भी काम लेती है. हो सकता है आपको यह खबर एक पक्षीय लगे.
दरअसल, पुलिस कुछ करे तो बुरी और ना करे तो बुरी, शाहीन बाग में पुलिस ने कुछ नहीं किया तो भी बुरी बनी और लखनऊ में शाहीन बाग बनने से रोक दिया तो भी बुरी बनी. माने कुल मिलाकर कहें तो पुलिस को किसी भी रूप में लोग क्लीनचिट नहीं देना चाहते. पुलिस एएमयू में और जेएनयू में सीधे एंट्री करती है कार्रवाई करती है तो भी बुरी और पुलिस जेएनयू गेट के बाहर खड़ी रहती है तो भी बुरी. लेकिन एक पुलिसकर्मी कितना संयमशील होता है यह जानने के लिए यह वीडियो काफी है. यह लखनऊ की वीडियो है जहां एक और शाहीन बाग़ बनने से पुलिस ने रोक दिया. उसके बाद प्रदर्शन कारियों
ने जमकर पुलिस को ख़री खोटी सुनाई.
इतना ही नहीं एक प्रदर्शनकारी महिला पुलिस को अभद्र गालियां दे रही है, अनर्गल बातें बोल रही है, बावजूद उसके पुलिस अपना काम कर रही है.शब्द ऐसे कि कोई सुन भी न पाए. आप भी देखिए और अपने रूप मे पुलिस को
परिभाषित कीजिए.

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Prakash Pandey

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