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पांडेयजी तो बोलेंगे बोल वचन खास

बड़ी बात: तो क्या कोरोना के बाद ऐसा होगा आपके बच्चों की पढ़ाई का तरीका, क्या कहती है रिपोर्ट, जान लीजिए

कोरोना वायरस महामारी पर लगाम लगाने के लिए पूरे देश को लॉक डाउन किया गया. इस महामारी से कब मुक्ति मिलेगी कहना मुश्किल हो गया है. लगभग 15 मार्च से ही देशभर में स्कूल और कॉलेजों को बंद कर दिया गया है. ऐसे में अभिभावकों के सामने यह चिंता लगातार सता रही है कि आखिर कोरोना के इस दौर में उनके बच्चों की पढ़ाई का स्वरूप क्या होगा? उनको कैसे पढ़ा जाएगा? क्या छात्रों को पढ़ाए जाने वाले पैटर्न को बदल दिया जाएगा? इन सभी विषयों पर आज अभिभावक परेशान हैं.
इन सवालों के जवाब में पियर्सन द्वारा एक अध्ययन किया गया है. पियरसन के मुताबिक कोरोनावायरस महामारी और उसके कारण लागू लॉक डाउन का दौर बीतने के बाद स्कूल और और कॉलेजों की स्थाई तकनीकी और सरंचना में निवेश करना होगा. मतलब विद्यालयों और कॉलेजों की तकनीक को एडवांस करना होगा. पियसर्न के मुताबिक अध्यापकों का प्रशिक्षण डिजिटल वातावरण में काम करने के कौशल पर केंद्रित होगा और उच्च शिक्षण संस्थानों में परीक्षा पारंपरिक तरीकों के बजाय ऑनलाइन माध्यम से कराई जाएगी.

क्या है पियर्सन

ऑनलाइन शिक्षा की वकालत और शिक्षा के बदलते स्वरूप की जानकारी देने वाले पियर्सन एक शैक्षणिक प्रकाशन और प्रशिक्षण के क्षेत्र में स्कूल और छात्रों को वैश्विक स्तर पर सेवा देने वाली अग्रणी कंपनी है जिसका मुख्यालय लंदन में स्थित है.
कोविड-19 के दौर के बाद शिक्षा में उभरने वाले आयामों पर अध्ययन करने के बाद कंपनी ने कहा है कि

‘कोविड-19 महामारी के कारण डिजिटल माध्यम से अधिक मात्रा में लोग पढ़ाई कर रहे हैं और कम अवधि वाले पाठ्यक्रम भी लोकप्रिय हो रहे हैं. इन बदलावों से तो कठिनाई हो रही है लेकिन इनसे शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार के उदाहरण भी सामने आ रहे हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि शैक्षणिक जगत में डिजिटल माध्यम का प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है.’

बढ़ जाएगा डिजिटल प्रयोग

कंपनी ने अपने अध्ययन में यह भी कहा है कि
“स्कूल और कालेजों में पढ़ाई करने के लिए डिजिटल माध्यम का प्रयोग और अधिक किया जाएगा. शैक्षणिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए व्हाट्सएप, जूम, टीम जैसे ऐप और ईमेल का प्रयोग बढ़ेगा. अकादमी संस्थान ऐसी अवसंरचना का विकास करेंगे जिसमें अध्यापक और छात्र अकादमी परिसर से बाहर रहते हुए भी पठन-पाठन कर सकेंगे. संस्थान ऐसे स्थाई तकनीकी अवसंरचना में निवेश करेंगे जिनके माध्यम से गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन शिक्षा दी जा सकेगी.पियर्सन ने यह अध्ययन विभिन्न देशों में शिक्षा के लिए अपनाए जा रहे तरीकों के आधार पर किया है. इसके अनुसार उच्च शिक्षण संस्थान परीक्षा के पारंपरिक तरीके की बजाय ऑनलाइन माध्यम से छात्रों का मूल्यांकन करेंगे.’

कई देशों ने माना है कि कोरोना काफी लंबे समय तक परेशानी के रूप में रहेगा. स्थाई उपचार तक इसके साथ ही जीने की आदत डालनी पड़ेगी. भारत सरकार ने भी कोरोनावायरस के साथ चलने की बात को स्वीकार किया है. इतना ही नहीं डिजिटल एजुकेशन में परिवर्तन के हिमायती दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी कोरोना के लंबे समय तक चलने की बात को स्वीकार किया. इतना ही नही आईसीएमआर और एम्स जैसे संस्थान ने भी कोरोना के प्रभाव के जून और जुलाई में बढ़ने की आशंका जताई है ऐसे में आने वाले समय में डिजिटल एजुकेशन बड़ा स्वरूप लेगा इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता.

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Prakash Pandey

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