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परंपरा निभाने के लिए पिता ने बेटे की पुतले से शादी करवाई, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की एक शादी आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि यहां दूल्हा भी है, बारात भी है लेकिन दूल्हे की जगह पर एक पुतला है जिसके साथ दूल्हे ने पंडित जी की मौजूदगी में अग्नि के सात फेरे लिए और स्टेचू को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया.
ऐसा नहीं है कि शादी की कोई औपचारिकता की गई बल्कि बाकायदे प्रयागराज शहर से 30 किलोमीटर दूर घूरपुर इलाके के भैदपुर गांव में दूल्हे की बारात भी निकली. मंगलवार की शाम निकली बारात रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी 90 वर्षीय शिवमोहन पाल के सबसे छोटे बेटे पंचराज की थी. पंचराज की बारात घर से निकल कर घूमते हुए वापस घर आ जाती है.
मास्टर डिग्री धारक शिव मोहन पाल की तीन बेटियां और 6 बेटा है. शिक्षा लिए हमेशा जागरूक रहने वाले श्रीमान ने अपने सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा दीक्षा दिलाई लेकिन उनका सबसे छोटा बेटा पंचराज शिक्षित नहीं. हुआ बकौल शिवमोहन पंचराज को बचपन से ही पढ़ाई पसंद नहीं थी, यही कारण रहा कि वह अनपढ़ रह गया.

शादी ना कराने का कारण जानकर रह जाएंगे हैरान

शिवमोहन के मुताबिक पंचराज के पास ना तो नौकरी है, ना संपत्ति और ना ही वह शिक्षित है, ऐसे में किसी लड़की से शादी कराने के बाद उसका जीवन खराब हो जाता इसलिए उन्होंने अपने बेटे की शादी किसी लड़की से नहीं कराई.

पुतले से शादी के पीछे शिव मोहन का तर्क

निरक्षरता के कारण शिव मोहन अपने बेटे की शादी किसी लड़की से नहीं करना चाहते थे लेकिन पुतले से शादी कराने के पीछे शिवमोहन तर्क देते हैं कि

“मेरी उम्र तब 90 वर्ष हो चुकी है अब जीवन कब साथ छोड़ दे यह कहा नहीं जा सकता. हमारे हिंदू परंपरा के तहत बेटे के विवाहित होने के बाद तेरहवीं हो सकती है इसलिए पंचराज की शादी करा देना उचित लगा ताकि उस समय कोई व्यवधान ना आए.”

शिव मोहन के इस विचार और पुतले से शादी के अब चर्चा प्रयागराज से बाहर निकलकर पूरे देश में होने लगी है. पुतले से शादी के पीछे का तर्क शिव मोहन वैचारिक प्रभाव को बढ़ा रहा है.